क्यों होती है डूबते हुए सूर्य की पूजा, कारण जान रह जाएंगे हैरान

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सुबह के समय उगते  हुए सूर्य को जल देना बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे सूर्यदेव बहुत प्रसन्न होते हैं। सूर्य ग्रह से संबंधित दोष इससे दूर होते है साथ ही हृदय रोग, अकाल मृत्यु और नौकरी व्यवसाय के लिए भी उगते सूर्य को जल देना लाभकारी माना गया है चलो जानते है की छठ पर्व में डूबते सूर्य की पूजा करना क्यों माना शुभ माना गया है…
Chhath_Puja 2017
दरअसल डूबते सूर्य पूजा की शुरुआत आज से  लगभग 1 करोड़ 43 लाख साल पहले शुरू हुई थी, ऐसा नारद पुराण में बताया गया है।



दरअसल छठ पूजा में शाम के समय होने वाली सूर्य पूजा का संबंध संतान सुख से है। पुराणों के अनुसार उन दिनों हेहेया वंशीय राजा कार्तवीर्य पृथ्वी पर राज करते थे। ओर नियमित उगते सूर्य की पूजा किया करते थे। जिसके बावजूद राजा के 99 पुत्र हुए और सभी मृत्यु को प्राप्त हो गए।
chhat pooja 2017

राजा ने नारद मुनि से संतान को जीवित करने का उपाय पूछा। तब नारद मुनि ने बताया था कि आप  शाम के समय भी सूर्यदेव की पूजा करिये। राजा ने नारद मुनि के कहने पर शाम के समय भी डूबते सूर्य की पूजा की इससे राजा को 100वां पुत्र प्राप्त हुआ जो सहस्रबाहु कहलाया। राजा का यह पुत्र जीवित रहा और पराक्रमी हुआ।



इस घटना के बाद से ही छठ पर्व पर डूबते सूर्य की भी पूजा की शुरुआत हुई। पुराणों मे उल्लेख किया गया है कि सूर्योदय के समय सूर्यदेव को जल देने से दूध अर्पण करने का फल मिलता है जिससे संतान सुख की प्राप्ति होती है।

यही कारण है कि छठ पर्व के अवसर पर डूबते सूर्य को भी अर्घ्य दिया जाता है।
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